श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.25.45 
পণ্ডিত বলেন—“প্রভু মোর কোন্ দুঃখ
যার ঘরে সুপ্রসন্ন তোমার শ্রী-মুখ”
पण्डित बलेन—“प्रभु मोर कोन् दुःख
यार घरे सुप्रसन्न तोमार श्री-मुख”
 
 
अनुवाद
श्रीवास पंडित ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, जब आपका मनोहर कमल मुख मेरे घर में विद्यमान है, तो मुझे क्या कष्ट हो सकता है?"
 
Srivasa Pandita replied, "O Lord, when Your beautiful lotus face is present in my house, what trouble can I have?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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