|
| |
| |
श्लोक 2.25.45  |
পণ্ডিত বলেন—“প্রভু মোর কোন্ দুঃখ
যার ঘরে সুপ্রসন্ন তোমার শ্রী-মুখ” |
पण्डित बलेन—“प्रभु मोर कोन् दुःख
यार घरे सुप्रसन्न तोमार श्री-मुख” |
| |
| |
| अनुवाद |
| श्रीवास पंडित ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, जब आपका मनोहर कमल मुख मेरे घर में विद्यमान है, तो मुझे क्या कष्ट हो सकता है?" |
| |
| Srivasa Pandita replied, "O Lord, when Your beautiful lotus face is present in my house, what trouble can I have?" |
| ✨ ai-generated |
| |
|