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श्लोक 2.25.44  |
প্রভু বলে,—“আজি মোর চিত্ত কেমন করে
কোন দুঃখ হৈযাছে পণ্ডিতের ঘরে” |
प्रभु बले,—“आजि मोर चित्त केमन करे
कोन दुःख हैयाछे पण्डितेर घरे” |
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| अनुवाद |
| भगवान बोले, "मैं बता नहीं सकता कि आज मुझे कैसा लग रहा है। क्या श्रीवास के घर में कोई विपत्ति आ गई है?" |
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| The Lord said, "I cannot tell you how I feel today. Has some calamity befallen Srivas's house?" |
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