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श्लोक 2.25.19  |
প্রেম-যোগে সেবা করিলেই কৃষ্ণ পাই
মাথা মুডাইলে যম-দণ্ড না এডাই |
प्रेम-योगे सेवा करिलेइ कृष्ण पाइ
माथा मुडाइले यम-दण्ड ना एडाइ |
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| अनुवाद |
| मनुष्य केवल प्रेमपूर्वक उनकी सेवा करके कृष्ण को प्राप्त कर सकता है, किन्तु केवल सिर मुंडा लेने से यमराज के दण्ड से बच नहीं सकता। |
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| One can attain Krishna only by serving Him with love, but one cannot escape the punishment of Yamaraja merely by shaving one's head. |
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