श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.25.17 
এতেক কারুণ্য শুনিঽ প্রভুর শ্রী-মুখে
কান্দিতে লাগিলা ভক্ত-গণ প্রেম-সুখে
एतेक कारुण्य शुनिऽ प्रभुर श्री-मुखे
कान्दिते लागिला भक्त-गण प्रेम-सुखे
 
 
अनुवाद
भगवान के मुख से ऐसे करुणामय वचन सुनकर सभी भक्तजन प्रेम के मारे खुशी से रोने लगे।
 
Hearing such compassionate words from the mouth of God, all the devotees started crying with joy out of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)