श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 25: श्रीवास के मृत पुत्र के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.25.12 
ক্ষণেকে দেখযে নৃত্য সজল-নযনে
পুনঃ পুনঃ গঙ্গা-জল বহিঽ বহিঽ আনে
क्षणेके देखये नृत्य सजल-नयने
पुनः पुनः गङ्गा-जल वहिऽ वहिऽ आने
 
 
अनुवाद
कभी-कभी भगवान को नृत्य करते देख उसकी आंखों में आंसू आ जाते, तो वह बार-बार गंगाजल लाने जाती।
 
Sometimes, seeing God dancing, tears would come to her eyes, so she would go again and again to bring Ganga water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)