श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.24.96 
ইথে এক জনের হৈযা পক্ষ যেই
অন্য জনে নিন্দা করে, ক্ষয যায সেই
इथे एक जनेर हैया पक्ष येइ
अन्य जने निन्दा करे, क्षय याय सेइ
 
 
अनुवाद
अतः यदि कोई व्यक्ति उनमें से किसी एक का पक्ष ले और दूसरे की निन्दा करे, तो वह नष्ट हो जाता है।
 
Therefore, if a person takes the side of one of them and criticizes the other, he is destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)