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श्लोक 2.24.95  |
কৃষ্ণ-প্রেম-সুধা-রসে মত্ত দুই জন
অন্যোন্যে কলহ করেন সর্ব-ক্ষণ |
कृष्ण-प्रेम-सुधा-रसे मत्त दुइ जन
अन्योन्ये कलह करेन सर्व-क्षण |
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| अनुवाद |
| कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम की अमृतमयी धुन में मग्न होकर वे दोनों आपस में निरन्तर झगड़ते रहते थे। |
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| Immersed in the nectar-like melody of ecstatic love for Krishna, they both quarreled incessantly. |
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