श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.24.83 
বৈষ্ণব-সভায কেনে মহা-মাতোযাল?
ঝাট নাহি পালাইলে নহিবেক ভাল”
वैष्णव-सभाय केने महा-मातोयाल?
झाट नाहि पालाइले नहिबेक भाल”
 
 
अनुवाद
"तुम जैसे महामना शराबी इस वैष्णव सभा में क्या कर रहे हो? अभी यहाँ से चले जाओ, नहीं तो मुसीबत में पड़ जाओगे।"
 
"What are you, a high-minded drunkard, doing in this Vaishnava gathering? Get out of here right now, or you'll get into trouble."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)