श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.24.76 
বিশ্বরূপ দেখিযা অদ্বৈত-নিত্যানন্দ
কাহারো নাহিক বাহ্য,—পরম আনন্দ
विश्वरूप देखिया अद्वैत-नित्यानन्द
काहारो नाहिक बाह्य,—परम आनन्द
 
 
अनुवाद
भगवान के विश्वरूप को देखने के बाद, अद्वैत और नित्यानन्द ने महान् आनंद में सारी बाह्य चेतना खो दी।
 
After seeing the universal form of the Lord, Advaita and Nityananda lost all external consciousness in great bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)