श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  2.24.75 
ক্ষণেকে সকল সম্বরিযা গৌরচন্দ্র
চলিলেন নিজ-গৃহে লৈ ভক্ত-বৃন্দ
क्षणेके सकल सम्वरिया गौरचन्द्र
चलिलेन निज-गृहे लै भक्त-वृन्द
 
 
अनुवाद
थोड़े समय के बाद गौरचन्द्र ने अपना विश्वरूप छुपा लिया और भक्तों के साथ अपने निवास स्थान पर लौट आये।
 
After some time, Gaurachandra hid his Vishwaroopa and returned to his abode with his devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)