| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श » श्लोक 72 |
|
| | | | श्लोक 2.24.72  | ভক্তি-যোগ, ভক্তি-যোগ, ভক্তি-যোগ-ধন
ঽভক্তিঽ এই-কৃষ্ণ-নাম-স্মরণ-ক্রন্দন | भक्ति-योग, भक्ति-योग, भक्ति-योग-धन
ऽभक्तिऽ एइ-कृष्ण-नाम-स्मरण-क्रन्दन | | | | | | अनुवाद | | भक्ति सेवा, भक्ति सेवा, भक्ति सेवा ही सबसे बड़ा खजाना है। भक्ति सेवा का अर्थ है कृष्ण के नामों का स्मरण करते हुए रोना। | | | | Devotional service, devotional service, devotional service is the greatest treasure. Devotional service means crying while remembering the names of Krishna. | | ✨ ai-generated | | |
|
|