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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 69
श्लोक
2.24.69
সর্ব মহেশ্বর গৌরচন্দ্রঽ যে না বলে
বৈষ্ণবের অদৃশ্য সে পাপী সর্ব-কালে
सर्व महेश्वर गौरचन्द्रऽ ये ना बले
वैष्णवेर अदृश्य से पापी सर्व-काले
अनुवाद
जो मनुष्य गौरचन्द्र को सबके स्वामी के रूप में महिमावान नहीं मानता, वह नित्य पापी है, तथा वैष्णवों के दर्शन के योग्य नहीं है।
He who does not consider Gaurachandra to be glorious as the Lord of all is a perpetual sinner and is not worthy of the darshan of the Vaishnavas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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