श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.24.67 
এ সব কৌতুক হয শ্রীবাস-মন্দিরে
তথাপি দেখিতে শক্তি অন্য নাহি ধরে
ए सब कौतुक हय श्रीवास-मन्दिरे
तथापि देखिते शक्ति अन्य नाहि धरे
 
 
अनुवाद
ये लीलाएँ श्रीवास के घर में घटित हुईं, फिर भी अन्य किसी में इन्हें देखने की शक्ति नहीं थी।
 
These pastimes occurred in the house of Srivasa, yet no one else had the power to see them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)