श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.24.66 
ঽপ্রভু প্রভুঽ বলিঽ স্তুতি করে দুই জন
বিশ্বরূপ দেখিযা আনন্দ-ময মন
ऽप्रभु प्रभुऽ बलिऽ स्तुति करे दुइ जन
विश्वरूप देखिया आनन्द-मय मन
 
 
अनुवाद
दोनों प्रभुओं ने प्रार्थना की और कहा, “प्रभु! प्रभु!” भगवान के उस विश्वरूप को देखकर उनके मन आनंद से भर गए।
 
Both the lords prayed and said, “Lord! Lord!” Seeing that universal form of the Lord, their hearts were filled with joy.
तात्पर्य
श्लोक के भावार्थ देखिये: "अमार प्राभु प्राभु श्री गौरसुंदर - श्री गौरसुंदर मेरे प्रभु का भी प्रभु है" । (चै. आदि १७.१५३)
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)