श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.24.64 
নিত্যানন্দ-অদ্বৈতে দেখিযা বিশ্বম্ভর
আনন্দে নাচযে বিষ্ণু-গৃহের ভিতর
नित्यानन्द-अद्वैते देखिया विश्वम्भर
आनन्दे नाचये विष्णु-गृहेर भितर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर के उस रूप को देखकर नित्यानंद और अद्वैत मंदिर कक्ष में आनंद से नृत्य करने लगे।
 
Seeing that form of Visvambhara, Nityananda and Advaita started dancing with joy in the temple room.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)