श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.24.56 
পরম আনন্দে প্রভু নিত্যানন্দ রায
পর্যটন সুখে ভ্রমে সর্ব নদীযায
परम आनन्दे प्रभु नित्यानन्द राय
पर्यटन सुखे भ्रमे सर्व नदीयाय
 
 
अनुवाद
इस बीच, नित्यानंद प्रभु बड़े आनंद में नादिया में विचरण कर रहे थे।
 
Meanwhile, Nityananda Prabhu was wandering in Nadia in great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)