श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.24.52 
মহা-অগ্নি যেন জ্বলে সকল বদন
পোডযে পাষণ্ড-পতঙ্গ-দুষ্ট-গণ
महा-अग्नि येन ज्वले सकल वदन
पोडये पाषण्ड-पतङ्ग-दुष्ट-गण
 
 
अनुवाद
उस विश्वरूप के मुख से महान अग्नि निकली और उन नास्तिकों तथा दुष्टों को जला डाला, जो पतंगों की तरह उस अग्नि में प्रविष्ट हो गये थे।
 
A great fire emerged from the mouth of that universal form and burnt those atheists and evil people who had entered that fire like moths.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)