श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.24.51 
কোটি চক্ষু, বাহু, মুখ দেখে পুনঃ পুনঃসম্
মুখে দেখযে স্তুতি করযে অর্জুন
कोटि चक्षु, बाहु, मुख देखे पुनः पुनःसम्
मुखे देखये स्तुति करये अर्जुन
 
 
अनुवाद
उन्होंने लाखों आँखें, भुजाएँ और मुख देखे। फिर उन्होंने अर्जुन को भी भगवान के समक्ष प्रार्थना करते देखा।
 
He saw millions of eyes, arms, and faces. Then he saw Arjuna praying to the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)