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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
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श्लोक 48
श्लोक
2.24.48
বলিতে অদ্বৈত মাত্র দেখে এক রথ
চতুর্-দিগে সৈন্য-দলে মহা-যুদ্ধপথ
बलिते अद्वैत मात्र देखे एक रथ
चतुर्-दिगे सैन्य-दले महा-युद्धपथ
अनुवाद
जब अद्वैत ने ये शब्द कहे, तो उन्होंने युद्धभूमि में युद्धरत सेनाओं से घिरा एक रथ देखा।
When Advaita said these words, he saw a chariot surrounded by fighting armies on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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