vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श
»
श्लोक 47
श्लोक
2.24.47
অদ্বৈত বলযে,—“প্রভু পূর্বে অর্জুনেরে
যাহা দেখাইলে তাহা ইচ্ছা বড করে”
अद्वैत बलये,—“प्रभु पूर्वे अर्जुनेरे
याहा देखाइले ताहा इच्छा बड करे”
अनुवाद
अद्वैत ने उत्तर दिया, "हे प्रभु, मुझे उस रूप को देखने की तीव्र इच्छा है जो आपने पहले अर्जुन को दिखाया था।"
Advaita replied, “O Lord, I have a strong desire to see the form that You showed to Arjuna earlier.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×