श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.24.40 
ভক্ত-আর্তি-পূর্ণকারী সদানন্দ রায
আইলা অদ্বৈত যথা গডগডিঽ যায
भक्त-आर्ति-पूर्णकारी सदानन्द राय
आइला अद्वैत यथा गडगडिऽ याय
 
 
अनुवाद
सदा आनंदित रहने वाले भगवान अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। इसलिए वे उस स्थान पर आए जहाँ अद्वैत भूमि पर लोट रहा था।
 
The ever-blissful Lord removes the sufferings of His devotees. So He came to the place where Advaita was rolling on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)