श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.24.37 
কিছু স্থির হঞা যদি আচার্য বসিলাশ্
রীবাস-রামাই-আদি তবে স্নানে গেলা
किछु स्थिर हञा यदि आचार्य वसिलाश्
रीवास-रामाइ-आदि तबे स्नाने गेला
 
 
अनुवाद
जब अद्वैत आचार्य शांत होकर बैठ गए, तब श्रीवास, रमाई तथा कुछ अन्य लोग स्नान करने चले गए।
 
When Advaita Acharya calmed down and sat down, Srivas, Ramai and some others went to take bath.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)