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श्लोक 2.24.32  |
এক দিন অদ্বৈত নাচেন গোপী-ভাবে
কীর্তন করেন সবে মহা-অনুরাগে |
एक दिन अद्वैत नाचेन गोपी-भावे
कीर्तन करेन सबे महा-अनुरागे |
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| अनुवाद |
| एक दिन जब सभी लोग बड़ी लगन से कीर्तन कर रहे थे, तब अद्वैत गोपी के भाव में नाच रहा था। |
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| One day, when everyone was doing kirtan with great devotion, Advaita was dancing in the mood of Gopi. |
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