श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.24.27 
ছাডিযা আপন বাস প্রভু-বিশ্বম্ভর
বৈষ্ণব-সবের ঘরে থাকে নিরন্তর
छाडिया आपन वास प्रभु-विश्वम्भर
वैष्णव-सबेर घरे थाके निरन्तर
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वम्भर अपने घर से दूर रहते थे और हमेशा वैष्णवों के घरों में ही रहते थे।
 
Lord Vishvambhar lived away from his home and always stayed in the houses of Vaishnavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)