श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.24.21 
ঽমথুরাঽ ঽমথুরাঽ কোন-দিন বলে সুখে
কোন-দিন পৃথিবীতে নখে অঙ্ক লেখে
ऽमथुराऽ ऽमथुराऽ कोन-दिन बले सुखे
कोन-दिन पृथिवीते नखे अङ्क लेखे
 
 
अनुवाद
किसी दिन वे प्रसन्नतापूर्वक जप करते, “मथुरा! मथुरा!” किसी दिन वे अपने नाखूनों से ज़मीन पर चित्र बनाते।
 
Some days he would joyfully chant, "Mathura! Mathura!" Other days he would draw pictures on the ground with his nails.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)