श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 24: भगवान का अद्वैत को अपना विश्वरूप का प्रदर्श  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.24.17 
“কোথাকার কৃষ্ণ তোর মহা-দস্যু সে
শঠ ধৃষ্ট কৈতব-ভজে বা তারে কে?
“कोथाकार कृष्ण तोर महा-दस्यु से
शठ धृष्ट कैतव-भजे वा तारे के?
 
 
अनुवाद
"तुम्हारा कृष्ण कहाँ से आया है? वह तो बड़ा दुष्ट है। ऐसे कपटी, धूर्त, धोखेबाज़ की पूजा कौन करेगा?"
 
"Where did your Krishna come from? He is a very wicked person. Who would worship such a deceitful, cunning, and fraudulent person?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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