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श्लोक 2.23.69  |
ঘরে ঘরে নগরে নগরে প্রতি-দ্বারে
করিবেন সঙ্কীর্তন, বলিল তোমারে” |
घरे घरे नगरे नगरे प्रति-द्वारे
करिबेन सङ्कीर्तन, बलिल तोमारे” |
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| अनुवाद |
| “मैं तुमसे कहता हूँ, वह घर-घर, हर घर और हर शहर में संकीर्तन करेगा।” |
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| “I tell you, he will chant in every house, every home and every city.” |
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