श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.23.6 
প্রতি-দিন নিশাভাগে করযে কীর্তন
ভক্ত-বিনু থাকিতে না পায অন্য জন
प्रति-दिन निशाभागे करये कीर्तन
भक्त-विनु थाकिते ना पाय अन्य जन
 
 
अनुवाद
भगवान हर रात कीर्तन करते थे। भक्तों के अलावा कोई भी इसमें भाग नहीं ले सकता था।
 
The Lord performed kirtan every night, and no one except his devotees could participate.
तात्पर्य
जब प्रभु जी ने रात्रि को कीर्तन के मार्ग की शिक्षा दी तब बाहरी लोगों को जाने नहीं दिया गया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)