श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.23.55 
আনন্দে ক্রন্দন করে সেই বিপ্র-বর
প্রভুর করুণা-গুণ স্মরে নিরন্তর
आनन्दे क्रन्दन करे सेइ विप्र-वर
प्रभुर करुणा-गुण स्मरे निरन्तर
 
 
अनुवाद
वह महापुरुष भगवान के दयालु गुणों का निरन्तर स्मरण करते हुए आनन्द से चिल्लाने लगा।
 
That great man started shouting with joy, constantly remembering the merciful qualities of God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)