श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 514
 
 
श्लोक  2.23.514 
ভক্ত লাগিঽ প্রভুর সকল অবতার
ভক্ত বৈ কৃষ্ণ-কর্ম না জানযে আর
भक्त लागिऽ प्रभुर सकल अवतार
भक्त बै कृष्ण-कर्म ना जानये आर
 
 
अनुवाद
परम भगवान अपने भक्तों के लिए अवतार लेते हैं। भक्तों के अलावा कोई भी कृष्ण के कार्यों को नहीं समझ सकता।
 
The Supreme Lord incarnates for His devotees. No one except devotees can understand the actions of Krishna.
तात्पर्य
केवल परम भगवान के शाश्वत सेवक भगवान के शाश्वत अवतारों का अनुभव करने के योग्य हैं। परम भगवान हमेशा भक्तों के हृदयों में प्रकट होते हैं, जो शाश्वत रूप से सेवा करने के लिए प्रवृत्त होते हैं। जब तक कोई भगवान की सेवा करने के लिए प्रवृत्त नहीं होता, तब तक कृष्ण की गतिविधियाँ, या उनके शाश्वत लीलाएँ, किसी के बोध का उद्देश्य नहीं बनतीं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)