श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 505
 
 
श्लोक  2.23.505 
কেহ বলে,—“জগন্নাথ মিশ্র পুণ্যবন্ত”
কেহ বলে,—“নদীযার ভাগ্যের নাহি অন্ত”
केह बले,—“जगन्नाथ मिश्र पुण्यवन्त”
केह बले,—“नदीयार भाग्येर नाहि अन्त”
 
 
अनुवाद
एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “जगन्नाथ मिश्र परम पवित्र हैं।” किसी और ने कहा, “नादिया के सौभाग्य का कोई अंत नहीं है।”
 
Another person said, “Jagannath Mishra is supremely holy.” Someone else said, “Nadia's good fortune knows no bounds.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)