श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 504
 
 
श्लोक  2.23.504 
কেহ বলে,—“শচীর চরণে নমস্কার
হেন মহাপুরুষ জন্মিল গর্ভে যাঙ্র”
केह बले,—“शचीर चरणे नमस्कार
हेन महापुरुष जन्मिल गर्भे याङ्र”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, “मैं शची के चरणों में प्रणाम करता हूँ, जिनके गर्भ से ऐसे महान व्यक्तित्व ने जन्म लिया।”
 
Someone said, “I bow at the feet of Sachi, from whose womb such a great personality was born.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)