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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 500
श्लोक
2.23.500
চৈতন্য-চন্দ্রের কিছু অসম্ভব নয
ভ্রূ-ভঙ্গে যাহার হয ব্রহ্মাণ্ড-প্রলয
चैतन्य-चन्द्रेर किछु असम्भव नय
भ्रू-भङ्गे याहार हय ब्रह्माण्ड-प्रलय
अनुवाद
चैतन्यचंद्र के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। उनकी भौंहों के हिलने मात्र से ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड नष्ट हो जाता है।
Nothing is impossible for Chaitanyachandra. A mere movement of his eyebrows can destroy the entire universe.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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