श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 478
 
 
श्लोक  2.23.478 
হেন ভক্ত অদ্বৈতেরে বলিতে হরিষে
পাপী-সব দুঃখ পায নিজ-কর্ম-দোষে
हेन भक्त अद्वैतेरे बलिते हरिषे
पापी-सब दुःख पाय निज-कर्म-दोषे
 
 
अनुवाद
अपने पिछले कुकर्मों के कारण पापी लोग अद्वैत को भक्त के रूप में स्वीकार करने में अप्रसन्नता अनुभव करते हैं।
 
Due to their past misdeeds, sinful people feel unwilling to accept Advaita as a devotee.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)