श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 466
 
 
श्लोक  2.23.466 
ঽসেবক-বত্সল প্রভুঽ চারি-বেদে গায
সেবকের স্থানে কৃষ্ণ প্রকাশে সদায
ऽसेवक-वत्सल प्रभुऽ चारि-वेदे गाय
सेवकेर स्थाने कृष्ण प्रकाशे सदाय
 
 
अनुवाद
चारों वेदों में कहा गया है, "भगवान अपने सेवकों के प्रति स्नेही हैं।" कृष्ण सदैव अपने सेवकों के प्रति स्वयं को प्रकट करते हैं।
 
All four Vedas say, "The Lord is affectionate toward His servants." Krishna always reveals Himself to His servants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)