vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
»
श्लोक 466
श्लोक
2.23.466
ঽসেবক-বত্সল প্রভুঽ চারি-বেদে গায
সেবকের স্থানে কৃষ্ণ প্রকাশে সদায
ऽसेवक-वत्सल प्रभुऽ चारि-वेदे गाय
सेवकेर स्थाने कृष्ण प्रकाशे सदाय
अनुवाद
चारों वेदों में कहा गया है, "भगवान अपने सेवकों के प्रति स्नेही हैं।" कृष्ण सदैव अपने सेवकों के प्रति स्वयं को प्रकट करते हैं।
All four Vedas say, "The Lord is affectionate toward His servants." Krishna always reveals Himself to His servants.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×