श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 455
 
 
श्लोक  2.23.455 
ঽকৃষ্ণঽ বলিঽ কান্দে সর্ব-জগত হরিষে
সঙ্কল্প হৈল সিদ্ধি, গৌরচন্দ্র হাসে
ऽकृष्णऽ बलिऽ कान्दे सर्व-जगत हरिषे
सङ्कल्प हैल सिद्धि, गौरचन्द्र हासे
 
 
अनुवाद
जब सभी लोग रो रहे थे और आनंद में कृष्ण का नाम जप रहे थे, गौरचन्द्र मुस्कुरा रहे थे, क्योंकि उनका उद्देश्य पूरा हो गया था।
 
While everyone was crying and chanting Krishna's name in joy, Gaurachandra was smiling, because his purpose had been accomplished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)