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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 431
श्लोक
2.23.431
সে চন্দ্রের শোভা কিবা কহিবারে পারি
যাহাতে কীর্তন করে গৌরাঙ্গ শ্রী-হরি
से चन्द्रेर शोभा किबा कहिबारे पारि
याहाते कीर्तन करे गौराङ्ग श्री-हरि
अनुवाद
मैं उस चन्द्रमा की सुन्दरता का वर्णन करने में असमर्थ हूँ, जिसके प्रकाश में भगवान गौरहरि ने कीर्तन किया था।
I am unable to describe the beauty of the moon in whose light Lord Gaurahari performed kirtan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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