श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 430
 
 
श्लोक  2.23.430 
পুষ্প-ময পথে নাচিঽ চলে বিশ্বম্ভর
চতুর্-দিকে জ্বলে দীপ পরম সুন্দর
पुष्प-मय पथे नाचिऽ चले विश्वम्भर
चतुर्-दिके ज्वले दीप परम सुन्दर
 
 
अनुवाद
जिस मार्ग पर विश्वम्भर नृत्य कर रहे थे, वह फूलों से ढका हुआ था और चारों दिशाओं में अत्यंत आकर्षक मशालें जल रही थीं।
 
The path on which Vishvambhar was dancing was covered with flowers and very attractive torches were burning in all four directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)