श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 422
 
 
श्लोक  2.23.422 
“জয কৃষ্ণ মুকুন্দ মুরারি বনমালী”
গায সব নগরিযা দিযা হাতে তালি
“जय कृष्ण मुकुन्द मुरारि वनमाली”
गाय सब नगरिया दिया हाते तालि
 
 
अनुवाद
नवद्वीप के निवासियों ने तालियाँ बजाईं और गाया, "जय कृष्ण, मुकुंद, मुरारी, वनमाली!"
 
The residents of Navadvipa clapped and sang, "Jai Krishna, Mukunda, Murari, Vanamali!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)