श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 416
 
 
श्लोक  2.23.416 
জয জয অনন্ত-শযন রমা-কান্ত”
বাহু তুলিঽ স্তুতি করে সকল মহান্ত
जय जय अनन्त-शयन रमा-कान्त”
बाहु तुलिऽ स्तुति करे सकल महान्त
 
 
अनुवाद
“उन भगवान की जय हो जो अनंत शय्या पर लेटे हैं और जो लक्ष्मीजी के प्रिय स्वामी हैं।” इस प्रकार सभी भक्तों ने अपने हाथ ऊपर उठाकर प्रार्थना की।
 
“Victory to the Lord who lies on the eternal bed and who is the beloved lord of Lakshmi.” Thus all the devotees prayed with their hands raised.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)