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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 412
श्लोक
2.23.412
ঽঅক্রোধ পরমানন্দ তুমিঽ বেদে গায
বেদ-বাক্য প্রভু ঘুচাইতে না যুযায
ऽअक्रोध परमानन्द तुमिऽ वेदे गाय
वेद-वाक्य प्रभु घुचाइते ना युयाय
अनुवाद
“हे प्रभु, वेदों के कथनों की उपेक्षा करना उचित नहीं है, जो घोषित करते हैं, ‘आप क्रोध से मुक्त हैं और सदा आनंदित हैं।’
“O Lord, it is not right to ignore the statements of the Vedas, which declare, ‘You are free from anger and eternally blissful.’
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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