श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 411
 
 
श्लोक  2.23.411 
অṁশাṁশের ক্রোধে যাঙ্র সকল সṁহারে
সে তুমি করিলে ক্রোধ কোন্ জনে তরে
अꣳशाꣳशेर क्रोधे याङ्र सकल सꣳहारे
से तुमि करिले क्रोध कोन् जने तरे
 
 
अनुवाद
जब आपके पूर्ण अंश के क्रोध से सब कुछ नष्ट हो जाता है, तो आपके क्रोध से कौन बच सकता है?
 
When everything is destroyed by the anger of your full part, who can escape your anger?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)