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श्लोक 2.23.401  |
যম, কাল, মৃত্যু—মোর সেবকের দাস
মোর দৃষ্টি-পাতে হয সবার প্রকাশ |
यम, काल, मृत्यु—मोर सेवकेर दास
मोर दृष्टि-पाते हय सबार प्रकाश |
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| अनुवाद |
| "यमराज, काल और मृत्यु मेरे सेवकों के सेवक हैं। मेरी दृष्टि मात्र से ही सब कुछ प्रकट हो जाता है। |
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| "Yamaraja, Kaal and Mrityu are the servants of my servants. Everything becomes manifest with my mere glance. |
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