श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 383
 
 
श्लोक  2.23.383 
মাথার ফেলিযা পাগ কেহ সেই মেলে
অলক্ষিতে নাচযে, অন্তরে প্রাণ হালে
माथार फेलिया पाग केह सेइ मेले
अलक्षिते नाचये, अन्तरे प्राण हाले
 
 
अनुवाद
उनमें से कुछ ने अपनी पगड़ियाँ उतार दीं और कीर्तन में शामिल हो गए। गुप्त नृत्य करते हुए वे भय से काँप रहे थे।
 
Some of them took off their turbans and joined in the kirtan, trembling with fear as they danced in secret.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)