श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 374
 
 
श्लोक  2.23.374 
কেহ বলে,—“বামনের কে আছে কোথায!
সেই দুঃখে কাঙ্দে, হেন বুঝি যে সদায”
केह बले,—“वामनेर के आछे कोथाय!
सेइ दुःखे काङ्दे, हेन बुझि ये सदाय”
 
 
अनुवाद
दूसरे ने कहा, “मुझे लगता है कि इस ब्राह्मण को किसी की कमी खल रही होगी, इसलिए वह हमेशा दुःख में रोता रहता है।”
 
The other said, “I think this Brahmin must be missing someone, that is why he is always crying in sorrow.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)