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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 373
श्लोक
2.23.373
কেহ বলে,—“এ বামনা এত কান্দে কেন!
বামনের দুই চক্ষে নদী বহে যেন”
केह बले,—“ए वामना एत कान्दे केन!
वामनेर दुइ चक्षे नदी वहे येन”
अनुवाद
उनमें से एक बोला, "मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह ब्राह्मण इतना क्यों रो रहा है! ऐसा लग रहा है मानो इसकी दोनों आँखों से कोई नदी बह रही हो।"
One of them said, "I don't understand why this Brahmin is crying so much! It seems as if a river is flowing from both his eyes."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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