श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 356
 
 
श्लोक  2.23.356 
বাহ্য নাহি প্রভুর পরম-ভক্তি-রসে
বাহু তুলিঽ ঽহরি-বোল হরি-বোলঽ ঘোষে
बाह्य नाहि प्रभुर परम-भक्ति-रसे
बाहु तुलिऽ ऽहरि-बोल हरि-बोलऽ घोषे
 
 
अनुवाद
भगवान भक्ति की सर्वोच्च धुन में बाह्य चेतना से रहित थे जब उन्होंने अपनी भुजाएं उठाईं और “हरि बोल! हरि बोल!” का जाप किया।
 
The Lord was devoid of external consciousness in the highest melody of devotion as He raised His arms and chanted "Hari Bol! Hari Bol!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)