भगवान विश्वम्भर बार-बार नाचना बंद कर देते और कहते, “आज मुझे कोई परमानंद क्यों नहीं मिल रहा है?
Lord Vishvambhar would repeatedly stop dancing and say, “Why am I not getting any bliss today?
तात्पर्य
जो योगी सांसारिक क्रियाकलापों से मुक्त हैं और प्रभु के नाम, रूप, गुणों, सहचरों, विशेषताओं और लीला से विमुख हैं उन्हें कृष्ण प्रेम का कोई ज्ञान नहीं है। इसलिए, भले ही वे भौतिक गणना में श्रेष्ठ हों, ईश्वर के प्रेम के प्रति उनकी घृणा, जो जीवन के चार लक्ष्यों के परे है, उन्हें निगल जाती है। हालाँकि ऐसे बुरे संबंध को सामान्य लोगों की नजरों में वांछनीय माना जाता है, पर ऐसे संबंध में भगवान के प्रेम को पाने की कोई संभावना नहीं है। श्री गौरसुंदर ने प्रकट किया कि ईश्वर के प्रेम के प्रति विमुख व्यक्तियों के संग में ईश्वर प्रेम नहीं होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥