श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 330
 
 
श्लोक  2.23.330 
সর্ব-বন্দ্য মহেশ্বর যে নাম-প্রভাবে
হেন নাম সর্ব-লোকে শুনে, বলে এবে
सर्व-वन्द्य महेश्वर ये नाम-प्रभावे
हेन नाम सर्व-लोके शुने, बले एबे
 
 
अनुवाद
"इन नामों के प्रभाव से महेश्वर सभी के लिए पूजनीय हो गए हैं। अब सभी लोग इन पवित्र नामों का श्रवण और जप कर रहे हैं।"
 
"Due to the influence of these names, Maheshwar has become worshipable for all. Now everyone is listening and chanting these holy names."
तात्पर्य
महादेव सभी देवों द्वारा पूजनीय हैं। महादेव से सुनने के बाद देवता और मनुष्य पवित्र नामों का जाप करते हैं। विष्णुस्वामी-सम्प्रदाय, जो मूल संस्थापक रुद्र से आता है, की स्थापना मसीह के आगमन से 200 साल पहले मधुरा प्रांत में की गई थी। उस वंश में लक्ष्मीधर प्रकट हुए, जो नाम-कौमुदी के लेखक हैं और उनके भाई, श्रीधर स्वामीपाद, जिनकी रचनाएँ शुद्धाद्वैत दर्शन पर आधारित हैं। दोनों ने अपने लेखन में पवित्र नामों का महिमामंडन किया है। श्री सनातन गोस्वामी प्रभु ने श्री नाम-कौमुदी पुस्तक का महिमामंडन किया है। प्रेमाकर और अन्य [अचिंत्य-भेद-अभेद-वाद, पृष्ठ 105 में सुंदरा नंद विद्याविनोद के अनुसार, वल्लभाचार्य के पिता लक्ष्मण भट्ट, प्रेमाकर मुनि के शिष्य थे।] वल्लभाचार्य के वंशजों ने पवित्र नामों के अद्भुत महिमा को महसूस नहीं किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)