श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 329
 
 
श्लोक  2.23.329 
যে নাম-প্রভাবে তীর্থ-রাজ বারাণসী
যাহা গায শুদ্ধ-সত্ত্ব শ্বেতদ্বীপ-বাসী
ये नाम-प्रभावे तीर्थ-राज वाराणसी
याहा गाय शुद्ध-सत्त्व श्वेतद्वीप-वासी
 
 
अनुवाद
"इन नामों के प्रभाव से, वाराणसी तीर्थों का राजा कहलाया है। श्वेतद्वीप के दिव्य निवासी इन पवित्र नामों का जप करते हैं।"
 
"By the influence of these names, Varanasi is called the king of pilgrimages. The divine inhabitants of Shvetadvipa chant these holy names."
तात्पर्य
पाँच सिर वाले महादेव वाराणसी में निवास करते हैं और भगवान के पवित्र नामों का जाप करते हैं, इसलिए वाराणसी एक प्राथमिक तीर्थ या सीखने का प्राथमिक स्थान है। स्वेताद्वीप में निवास करने वाले परमेश्वर के साथी पवित्र नामों की महिमा का गुणगान करके भौतिक प्रकृति के तीन दोषों से मुक्त रहते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)